अधिवर्ष किसे कहते हैं (लीप ईयर ) What is leap year ?

    इस लेख मे –:

      1)  क्या होता है , लीप इयर ?

      2)  लीप इयर क्यों होता है  ?

      3)  लीप इयर की पहचान ?

      4) लीप वर्ष के एक दिन को यदि वर्ष मे शामिल न करे तो ?    

      5)  केलेण्डर का इतिहास ?

ग्रेगोरियन कैलेंडर में 1 वर्ष 365 दिन का होता है और वह 12 महीनों में बटा होता है महीनों में 30 और 31 दिन होते हैं और वर्ष का द्वितीय माह फरवरी 28 दिनों का होता है ! वही लीप ईयर में 366 दिन और फरवरी माह 29 दिनों का होता है 

            इस प्रकार लीप ईयर में सामान्य वर्ष की अपेक्षा 1 दिन अधिक होता है और 1 दिन में 24 घंटे होते हैं !

लीप ईयर क्यों होता है –:

लीप ईयर का प्रमुख कारण पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने में लगने वाला समय है, पृथ्वी 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट और 45 सेकेंड अर्थात लगभग 6 घंटे में सूर्य का एक चक्कर पूरा करती है जो 1 वर्ष के बराबर है 

             वर्ष की गणना में 365 दिनों को ही सम्मिलित किया जाता है, तो प्रत्येक वर्ष में 6 घंटे शेष बचे रह जाते हैं ।

       

           I    Year

          2     Year

          3     Year

          4     Year

        6   hours

         6   hours

         6   hours

         6   hours

                     Total        

         24 hours

इस प्रकार चौथे वर्ष 24 घंटे पूरे हो जाते हैं, जो 1 दिन के रूप में फरवरी माह में सम्मिलित होते हैं, और फरवरी 29 दिनों का और लीप वर्ष 366 दिनों का हो जाता है !

लीप वर्ष की पहचान कैसे करें –: 

यह सुनिश्चित करना कि कोई वर्ष लीप वर्ष है अथवा नहीं, यह एक गणितीय प्रक्रिया है, इसे उदाहरण से समझते हैं, किसी भी वर्ष में 4 से भाग देने पर यदि पूरा भाग चला जाए और शेषफल कुछ भी ना बचे तो वह वर्ष लीप वर्ष या अधि वर्ष होता है !

            उदाहरण के रूप में वर्ष 2024 को यदि 4 से भाग दे तो 

                                                                                       2024  /  4    = 506

वर्ष 2024 में 4 से पूरा भाग चला गया और शेषफल कुछ भी नहीं है तो वर्ष 2024 लीप वर्ष होगा इसी तरह से वर्ष 2025 को भी 4 से भाग देकर देखते हैं

                                                                                2025   /   4     =   506.25  

यहां भाग पूरा नहीं हुआ और उत्तर दशमलव में है अर्थात वर्ष 2025 लीप ईयर नहीं है ! 

          सदी वर्ष के लिए उस वर्ष को 400 से भाग देना होता है सदी वर्ष जैसे ( 1500 ,1600 , 1700 , 1800 , 1900 , 2000 , 2100 ) लीप वर्ष ज्ञात करने का नियम वही है यदि पूरा भाग चला गया तो वह सदी वर्ष लीप वर्ष है अन्यथा नहीं !

लीप वर्ष में एक अतिरिक्त दिन को सम्मिलित ना करें तो –:

लीप वर्ष के नियमानुसार प्रत्येक चौथे वर्ष में 1 दिन की वृद्धि हो जाती है, यदि इसे वर्ष में सम्मिलित ना करें तो, 100 वर्षों में 24 अधिवर्ष होते हैं, इस प्रकार 100 वर्षों के बाद 24 दिन या लगभग 1 महीना वर्ष से गायब हो जाएगा और कैलेंडर का धरती पर होने वाले मौसम परिवर्तन से सामंजस्य नहीं हो पाएगा, इसलिए लीप वर्ष के 1 दिन को वर्ष में सम्मिलित करना बहुत महत्वपूर्ण है !

कैलेंडर का इतिहास –:

काल समय और मौसमों के अनुरूप अलग-अलग सभ्यताओं में अलग-अलग कैलेंडर बनाए , जो मनुष्य को प्रकृति के साथ जुड़े रखते हैं ,आधुनिक ग्रेगोरियन कैलेंडर के इतिहास की बात करें तो, प्राचीन ग्रंथों में ऐसे रोमन राजा न्यूमा पॉलियंस के समय बनाया गया कैलेंडर प्राचीन माना जाता है !

                          प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर का आधार रोमन साम्राज्य के जूलियस सीजर का ईसा पूर्व पहली शताब्दी में बनाया गया कैलेंडर है !

                             46 ईसा पूर्व में यह पहली बार माना गया कि पृथ्वी 365 दिन और 6 घंटे में सूर्य का एक चक्कर लगाती है, जो वास्तविकता में 5 घंटे 48 मिनट और 45 सेकेंड है । इस कारण कैलेंडर को लागू करने के बाद 11 मिनट का अंतर पाया गया इसी 11 मिनट की अंतर को कैलेंडर में सुधारने के लिए करीब 1500 साल का समय लगा !

                  मेट बीड्स नामक व्यक्ति ने बताया कि 1 साल में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट और 45 सेकंड होते हैं जूलियन कैलेंडर में लीप वर्ष की गलती को सुधार कर पोप ग्रेगरी ने 1582 में नया कैलेंडर प्रस्तुत किया जो सर्वमान्य और सर्वाधिक प्रचलित है !

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