“कवच” रेल सुरक्षा प्रणाली

  इस लेख में –:

 1)रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ क्या है ! What is the Rail protection system ‘kavach ?

  2)रेल सुरक्षा प्रणाली कवच कैसे काम करती है !How does the ‘kavach’ system work ?

   3)कवच सुरक्षा प्रणाली की लागत कितनी है ! How much does ‘kavach’ cost ?

   4)कवच सुरक्षा प्रणाली किसने तैयार की है !Who has designed the kavach system

   5)सुरक्षा प्रणाली का प्रयोग कहां होगा  ! Where will kavach system be used ?

   6)कवच सुरक्षा प्रणाली के क्या लाभ है ! What is the advantage of kavach ? 

शुक्रवार 4 मार्च 2022 को दक्षिण मध्य रेलवे सुरक्षा की एक नई इबारत गढ़ने वाले “कवच” रेल सुरक्षा प्रणाली

का परीक्षण भारतीय रेल द्वारा किया गया । यह परीक्षण सिकंदराबाद और लिंगमपल्ली स्टेशनों के मध्य

संपन्न हुआ ! इस परीक्षण का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है; कि इस दौरान रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव

एक रेल में स्वयं मौजूद थे ।

इस सुरक्षा प्रणाली पर भारतीय रेल लंबे समय से कार्य कर रही थी; पूर्णत स्वदेशी तकनीक से निर्मित यह

प्रणाली भारतीय रेल को सुरक्षा के एक नए स्तर पर ले जाएगी ।

                      रेल के आमने-सामने की टक्कर में सबसे ज्यादा जान माल की हानि होती है, यह सिस्टम इस

तरह से होने वाली दुर्घटना से पूरी सुरक्षा देगा; इसके अलावा मानवीय भूल जो स्टेशन से या फिर रेल इंजन के

अंदर की गई हो ; से भी सुरक्षा प्रदान करेगा, और रेल की होने वाली दुर्घटनाओं को स्वचालित रूप से रोका जा

सकेगा !

“कवच” रेल सुरक्षा प्रणाली क्या है—:

कवच रेल परिचालन में सुरक्षा की SIL -4 प्रमाणित तकनीक है; जिसे ‘highest  level security’  माना जाता

है ! इस तकनीक में एक ही ट्रैक पर आ गई दो रेलगाड़ियों को आपस में टकराने से बचाने के अलावा मानवीय

भूल से होने वाली दुर्घटनाओं को भी रोका जा सकता है !

                 कवच रेलों के आमने-सामने की टक्कर से तो बचाएगा साथ ही यदि रेल ड्राइवर सिग्नल की

अनदेखी कर दे या भूल वस सिग्नल नहीं होने पर भी रेल को ना रोके, तो कवच की स्वचालित प्रणाली रेल

इंजन में ऑटोमेटिक ब्रेक लगाकर उसे रोक देगी, और किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव संभव होगा ! इसके

अतिरिक्त रेल क्रॉसिंग पर रेल इंजन की horn भी ऑटोमेटिक तरीके से बजे उठेंगे ! जिससे रेल मार्ग को पार

करने वाले लोग सावधान हो जाएं और किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके !

कैसे काम करती है, कवच रेल सुरक्षा प्रणाली —;

कवच एक जटिल स्वचालित प्रणाली है ! यह “रेडियो कम्युनिकेशन माइक्रोप्रोसेसर ग्लोबल पोजिशनिंग

सिस्टम” पर आधारित है ! इसमें बहुत सारे उपकरण हाई radio-frequency के द्वारा एक दूसरे से जुड़े होते

हैं,और यह पूरा सिस्टम PRE प्रोग्राम होता है जो बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के (automatically)  कार्य

करता  है ! 

                  इस पूरे कवच सिस्टम को विस्तार से समझने के लिए इस में प्रयुक्त होने वाले सारे उपकरणों के

बारे में समझना होगा ! इस सिस्टम में उपकरणों को रेल पटरियों पर, रेल इंजन में और स्टेशन पर लगाया जाता है !

पटरी पर लगने वाले उपकरण –:

RFID antenna यह उपकरण पटरियों के बीच लगा होता है जो ट्रेन की लोकेशन को ट्रेस करके जरूरी सूचना

स्टेशन के कवच उपकरणों तक पहुंचाता है !

रेल इंजन में लगने वाले उपकरण—: 

RFID rider इंजन के अंदर लगा एक उपकरण है ! जो रेल ट्रैक के बीच लगे RFID antenna को रीड करके ट्रेन

की लोकेशन की सूचना ऊपर भेजता है! इसके अलावा DMI ( driver monitoring  interface)  इंजन में लगा

होता है : जो सिग्नल और अन्य सूचनाएं ट्रेन ड्राइवर को देता रहता है! ट्रेन इंजन के ऊपर LOCO RF  एंटीना भी

लगा होता है जो ट्रेन की लोकेशन स्पीड आदि की सूचना नजदीकी स्टेशन के रेडियो टावर तक पहुंचाता है !

इंजन की लोकेशन स्पीड आदि की सूचना को प्रोसेस करने के लिए एक उपकरण (प्रोसेस डिवाइस) भी इंजन के

अंदर लगा होता है !

स्टेशन में लगने वाले उपकरण –:

STCAS; RELAY RACK; SM ROOM; GSM & GPS ANTENNA प्रोसेसिंग यूनिट और हाई फ्रिकवेंसी

रेडियो टावर जैसे उपकरण  रेलवे स्टेशन में लगाए जाते हैं !

जब भी कोई रेल किसी स्टेशन की नियंत्रण सीमा में आती है तो पटरी पर लगे RFID एंटीना को इंजन में लगे

RFID रीडर द्वारा पहचान कर उसकी जानकारी इंजन में लगे प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाई जाती है, इसके

अलावा इंजन के पहिए में लगे एक अन्य उपकरण द्वारा ट्रेन की रफ्तार की सूचना भी प्रोसेसिंग यूनिट में भेज

दी जाती है, यह यूनिट इन सूचनाओं को इंजन के ऊपर लगे RF एंटीना के जरिए नजदीकी स्टेशन को रेडियो

टावर के माध्यम से भेज देता है !

            स्टेशन पर कवच के लगे विभिन्न उपकरणों द्वारा रेल की सूचनाओं को प्रोसेस करके आवश्यक

निर्देश स्वचालित तरीके से इंजन तक पहुंचा दी जाती है ! इन सारी सूचनाओं को जीपीएस के माध्यम से मुख्य

कंट्रोल रूम तक भी पहुंचाया जाता है, जो रेल और स्टेशन के बीच होने वाली ऑटोमेटिक प्रक्रिया पर नजर

बनाए रखता है !

             इस पूरे सिस्टम में जब एक ही ट्रैक पर 2 रेलगाड़ियां आ जाए तो यह सिस्टम उन दोनों को एक

सुरक्षित दूरी पर स्वचालित तरीके से रोक देता है ! इसके अलावा ड्राइवर के सिग्नल जंप करने पर या ओवर

स्पीडिंग करने पर भी यह सिस्टम कारगर है; और ऐसी परिस्थितियों में यह सिस्टम ट्रेन की स्पीड स्वचालित

रूप से कम कर देता है ! 

  “कवच” रेल सुरक्षा प्रणाली की लागत कितनी है –:  

यूरोपीय और अन्य देशों से इस तकनीक को खरीदने और लगाने में अनुमानित रूप से 2 करोड़ की लागत प्रति

किलोमीटर आती, परंतु कवच का विकास स्वदेशी है, और लागत भी 40 से 50 लाख रुपए प्रति किलोमीटर है !

जो आर्थिक रूप से भारतीय रेल पर कम वित्तीय भार डालेगा, और यह प्रणाली शीघ्रता-शीघ्र सारे देश के रेल

नेटवर्क में उपलब्ध होगी !

 

  कवच प्रणाली किसने तैयार की है –:

इस प्रणाली का विकास भारतीय रेल

मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाले

RDSO (research design and

standards organization)

अनुसंधान डिजाइन और मानक

संगठन द्वारा किया गया है, इसका मुख्यालय लखनऊ में स्थित है ! और इसकी स्थापना 1957 में की गई थी

! यह संगठन भारतीय रेल की सुरक्षा और आधुनिकीकरण की योजना अनुसंधान और सुझाव का कार्य करता है

“कवच” रेल सुरक्षा प्रणाली का उपयोग कहां होगा —:

इस सुरक्षा प्रणाली का उपयोग सारे देश के रेल मार्गों के लिए होगा; परंतु अभी वर्तमान में इस प्रणाली की

शुरुआत व्यस्ततम रेल मार्गों से की जाएगी; जिसमें दिल्ली मुंबई और दिल्ली कोलकाता रेल मार्ग मुख्य है !

अति शीघ्र यह मार्ग इस प्रणाली से लैस होंगे !और आगामी कुछ वर्षों में देश के सारे रेल मार्ग इस अचूक सुरक्षा

प्रणाली से लैस हो जाएंगे !

  “कवच” रेल सुरक्षा प्रणाली के लाभ —:

1 ) इस प्रणाली से भारतीय रेल जीरो दुर्घटना के लक्ष्य को हासिल कर सकती है ! साथ ही सुरक्षा में भी वृद्धि

होगी!

2) ट्रेनों को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया जा सकता है; जिससे रेलों की औसत रफ्तार मेंवृद्धि होगी !

3 ) खराब मौसम में ट्रेनों का परिचालन सरल होगा !

 4 ) भारतीय रेल इस तकनीक को अन्य देशों को हस्तांतरित करके  लाभ अर्जित कर सकती है,

इस प्रकार यह तकनीक न सिर्फ भारतीय रेल नेटवर्क को सुरक्षित बनाएगी अपितु

,दूसरे देशो को यह तकनीक हस्तांतरित करके लाभ कमाने का भी अवसर देगी !

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