gangrel dam | इतिहास, स्थिति, नदी, क्षमता, विस्तार और लंबाई, gangrel dam का पहुंच मार्ग |

इस लेख मे ;-

gangrel dam का इतिहास |

स्थिति /gangrel dam कहां स्थित है |

gangrel dam किस नदी पर निर्मित है |

gangrel dam की क्षमता |

gangrel dam का विस्तार और लंबाई |

gangrel dam की जल विद्युत शक्ति |

gangrel dam के लाभ |

gangrel dam के पास स्थित अन्य पर्यटन स्थल |

gangrel dam का पहुंच मार्ग |

 

छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा माने जाने वाली महानदी पर निर्मित gangrel dam छत्तीसगढ़ के दक्षिणी भाग के लिए किसी वरदान से कम नहीं है |

महा नदी पर निर्मित गंगरेल बांध या रविशंकर बांध और रुद्री बैराज से इस क्षेत्र में सिंचाई की क्षमता में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है |

गंगरेल बांध या रविशंकर बांध छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा बांध है, छत्तीसगढ़ के दक्षिणी जनजातीय बहुल क्षेत्र में स्थित इस बांध धमतरी जिले को प्रदेश में सर्वाधिक सिंचित जिला तो बनाया ही है, साथ ही रायपुर, बालोद, दुर्ग आदि जिलों में भी सिंचाई सुविधा का विस्तार हुआ है | भिलाई स्टील प्लांट को भी जल की आपूर्ति यहीं से होती है |

gangrel dam का इतिहास |

गंगरेल डैम के निर्माण का सर्वे कार्य 1965 में प्रारंभ हुआ, मई 1972 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस बांध के निर्माण की आधारशिला रखी थी |

वर्ष 1978 में यह बांध बनकर पूर्णता तैयार हुआ, इस बांध को गंगरेल गांव के पास दो पहाड़ियों के बीच बनाया गया है |

बांध के निर्माण के बाद लगभग 16000 एकड़ से भी ज्यादा भूमि डुबान क्षेत्र में आ गई | 55 गांव के 5000 से ज्यादा लोगों का विस्थापन इस बांध के निर्माण के बाद हुआ था |

स्थिति /gangrel dam कहां स्थित है |

यह बांध छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिण में स्थित जिला धमतरी में है |
धमतरी से आगे जगदलपुर मार्ग पर 3 किलोमीटर के बाद बांई ओर लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर गंगरेल जलाशय स्थित है | छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से इसकी कुल दूरी 92 किलोमीटर है |

gangrel dam किस नदी पर निर्मित है |

गंगरेल डैम का निर्माण महानदी पर किया गया है | यह नदी छत्तीसगढ़ के दक्षिण में स्थित जिला धमतरी से निकलती है |  यह नदी छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी नदी है, और इसका अपवाह क्षेत्र भी छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा है, छत्तीसगढ़ में यह नदी लगभग 246 किलोमीटर के लंबाई में प्रवाहित होने के बाद उड़ीसा राज्य में प्रवेश कर जाती है |

महानदी अत्यंत विशाल नदी है जिसका उद्गम धमतरी जिले के सिहावा पर्वत से होता है, और यह नदी अपने उद्गम के बाद उत्तर पूर्व दिशा में प्रवाहित होती है, छत्तीसगढ़ में यह नदी अत्यंत पवित्र मानी जाती है और इस नदी के तट पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थ स्थल स्थित है |

इस नदी पर बड़े-बड़े बांधों का निर्माण किया गया है, जिनमें से प्रमुख हैं रुद्री बांध, गंगरेल या रविशंकर बांध और उड़ीसा में निर्मित हीराकुंड बांध छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा बांध गंगरेल या रविशंकर बांध इसी नदी पर निर्मित है |

gangrel dam की क्षमता |

गंगरेल डैम  रविशंकर बांध छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा बांध है और इसकी कुल जल धारण क्षमता 15000 क्यूसेक है | बांध से जल निकासी के लिए कुल 14 गेट बनाए गए हैं |

gangrel dam का विस्तार और लंबाई |

gangrel dam
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यह बांध छत्तीसगढ़ का सबसे लंबा और सबसे बड़ा बांध है | इस बांध की कुल लंबाई 1830 मीटर और औसत ऊंचाई 30 मीटर या 100 फीट है |

रविशंकर जलाशय का विस्तार 95 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिससे 57000 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होती है |

gangrel dam की जल विद्युत शक्ति |

गंगरेल बांध पर निर्मित जल विद्युत ग्रह से 10 मेगावाट विद्युत का उत्पादन किया जाता है, जिसका छत्तीसगढ़ के धमतरी और रायपुर जिले में के उद्योगों में उपयोग कर लिया जाता है

gangrel dam के लाभ |

बांधों के निर्माण के पीछे मुख्य उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और जल विद्युत शक्ति का उत्पादन होता है, गंगरेल डैम के प्रमुख लाभ निम्न है |

भारत की सबसे बड़ी स्टील प्लांट में से एक भिलाई स्टील प्लांट की पानी की आवश्यकता के एक हिस्से की आपूर्ति इसी डैम से होती है |

धमतरी और उसके आसपास के जिलों में सिंचाई सुविधाओं का विकास इस डैम के कारण ही हुआ है, और छत्तीसगढ़ के नाम धान का कटोरा के अनुरूप इन जिलों में धान की दो से तीन फसल संभव हुई है |

गंगरेल बांध और उसके आसपास के पर्यटक क्षेत्रों को घूमने के लिए लाखों की संख्या में पर्यटक यहां आते हैं, जिससे स्थानीय लोगो के आय् और रोजगार के साधनों में वृद्धि हुई है |

gangrel dam के पास स्थित अन्य पर्यटन स्थल |

गंगरेल बांध को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे प्रयास किए हैं, और शायद इसी कारण से देश-विदेश के लाखों पर्यटक यहां प्रत्येक वर्ष पहुंचते हैं गंगरेल डैम पर खूबसूरत हट बने हुए हैं जिनकी की ऑनलाइन बुकिंग की जा सकती है,साथ ही बांध के पास रहने और 24 घंटे उसे निहारने का आनंद भी उठाया जा सकता है |इस स्थल पर विशाल बांध तट रेखा के कारण मिनी गोवा की भी संज्ञा दी गई है

सिहावा
धमतरी से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर घने वनों एवं पहाड़ियों से घिरा हुआ तीर्थ स्थल सिहावा स्थित है | सिहावा के उत्तर पूर्व में कर्णेश्वर में 6 प्राचीन मंदिर है, कर्णेश्वर का विशाल शिव मंदिर इस अंचल में शैव उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है | इन मंदिरों का निर्माण 1114 ईस्वी में सोमवंशी राजाओं ने कराया था | शिव मंदिर के शिलालेख से यह ज्ञात होता है कि यह क्षेत्र मूलतः सोमवंशी राज्य का एक भाग था, उनके सामंत यहां शासन करते थे | यहां स्थित श्रृंगी ऋषि के आश्रम के समीप पवित्र जल कुंड है, जहां से महानदी का उद्गम हुआ है । महर्षि ‘श्रृंगी’ ने अपने प्रिय शिष्य ‘महानंद’ के नाम पर इस नदी को महानदी नाम दिया था |

सीता नदी अभ्यारण
धमतरी जिले में धमतरी से 60 किलोमीटर दूर स्थित यह अभ्यारण छत्तीसगढ़ का सबसे पुराना अभ्यारण है | जिसका क्षेत्रफल 553 वर्ग किलोमीटर है, यहां पर विभिन्न प्रकार के जंगली जीव जंतुओं को उनके प्राकृतिक आवास में देखा जा सकता है |

मैडम सिल्लि बांध
अंग्रेजों के शासनकाल में निर्मित यह बांध साइफन फिल्टर तकनीक पर आधारित है | इस बांध के गेट हवा और पानी के दबाव से खुलते और बंद होते हैं |

gangrel dam का पहुंच मार्ग |

गंगरेल डैम को एक टूरिस्ट प्लेस के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार ने विकसित किया है |  यहां पहुंचने के लिए  सड़क, रेल और हवाई मार्ग उपलब्ध है |

सड़क मार्ग
यह बांध नेशनल हाईवे क्रमांक 30 पर स्थित है | छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सड़क मार्ग द्वारा यह स्थान सीधे जुड़ा हुआ है |

रेल मार्ग
इस बांध तक रेल द्वारा पहुंचने का साधन उपलब्ध नहीं है | नजदीकी रेलवे स्टेशन अवश्य धमतरी है लेकिन वहां तक नियमित ट्रेनों की शुरुआत अभी तक नहीं हुई है, मात्र एक ट्रेन का संचालन रायपुर से धमतरी के मध्य होता है |

भारत के किसी भी अन्य हिस्से से इस बांध तक पहुंचने के लिए रेल द्वारा रायपुर तक ही आया जा सकता है | उसके बाद सड़क मार्ग से लगभग 90 किलोमीटर की यात्रा करके इस बांध तक आसानी से पहुंचा जा सकता है|

हवाई मार्ग
नजदीकी हवाई अड्डा विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रायपुर के माना में स्थित है | जहां से अंतर्देशीय उड़ानों की सुविधा उपलब्ध है, भारत के किसी भी हिस्से से हवाई मार्ग द्वारा रायपुर पहुंचा जा सकता है फिर वहां से सड़क मार्ग द्वारा इस बांध तक पहुंचा जा सकता है |

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