बादल | बादल क्या है, कैसे बनते हैं, वर्षा से पूर्व बादलों का रंग कैसा होता है,बादल कैसे फटता है |

इस लेख में

बादल कैसे बनते हैं

बादल को इंग्लिश में क्या कहते हैं

बादल कैसे फटता है (Cloud burst)

वर्षा से पूर्व बादलों का रंग कैसा होता है

बादल के पर्यायवाची शब्द

बादलों का वर्गीकरण

पृथ्वी की सतह से जब जल वाष्प वाष्पित होकर हल्का हो जाता है तो, वह वायुमंडल में ऊपर की ओर उठता जाता है, ऊपर उठती  हवा रुद्धोष्म प्रक्रिया द्वारा ठंडी होती है जब इस जलवाष्प वाली हवा का तापमान जमाव बिंदु तक पहुंच जाता है तो बादलों का निर्माण होता है |
जब हवा हल्की और गर्म एवं आद्र होती है तो ऊपर उठने पर यह जल्दी ही ठंडी होकर संघनित होकर बादलों का रूप ले लेती है |
इस प्रकार आसमान की ऊंचाइयों पर जब जलवाष्प का जमाव् या संघनन होता है तो उनसे बने जल कणो या हिम कणों की विशाल मात्रा को ही बादल कहा जाता है।

बादल कैसे बनते हैं

बादलों का निर्माण किसी बड़ी जल राशि या समुद्र के ऊपर तेज धूप के पड़ने से वाष्पीकरण की क्रिया से बनते हैं, वाष्पीकरण से जल वाष्प में परिवर्तित होकर हल्की हो जाती है और आसमान में ऊपर जाकर ठंडी होकर बादलों का रूप ले लेती है ,और जब यह जमाव बिंदु तक पहुंचती है तो यह वर्षा की बूंदों में परिवर्तित हो जाती है, और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से धरती पर आ गिरती है|
एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी उठता है कि, बादलों के रूप में विशाल जल राशि कैसे आसमान में टिकी रहती है तो इसका मुख्य कारण यह है कि, बादलों का आकार् उनके भार से कई गुना ज्यादा होता है जो की हवा का अवरोध उन्हें गुरुत्वाकर्षण के विपरीत आसमान में स्थित बनाए रखता है |

बादल को इंग्लिश में क्या कहते हैं

बादल = CLOUD (Noun)
इस प्रकार इंग्लिश में बादल को क्लाउड कहते हैं एक उदाहरण से समझते हैं |
आज आसमान बादलों से भरा हुआ है |
The sky was full of clouds today
भारतीय सभ्यता में बादल और हवाओं के देवता– वरुण देव को माना गया है |
रोमन सभ्यता में बादलों एवं आसमान के देवता URANUS को माना जाता है |

बादल कैसे फटता है (Cloud burst)

जब किसी छोटे से इलाके में कम समय में बहुत ज्यादा बारिश हो जाए तो, इसे बादल फटना कहते हैं |

जब 20 से 25 वर्ग किलोमीटर के एरिया में 1 घंटे से भी कम समय में 100 m.m. या उससे अधिक बारिश हो जाए तो उसे बादलों का फटना कहते हैं |

बादलों के फटने की घटना अकस्मात या अचानक होती है और इसका पूर्वानुमान संभव नहीं है |

बादलों के फटने की घटना को आम तौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में देखा गया है |

जल वाष्प से भरे हुए बादल जब पहाड़ों से टकराते हैं और उन्हें आगे जाने का रास्ता नहीं मिलता है तो, वह एक ही स्थान पर अपना सारा जल गिरा देते हैं इसे ही बादलों का फटना कहते हैं |

भारत के उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में बरसात के मौसम में बादल फटने की घटना देखी गई है |

पहाड़ों की तलहटी पर बादल फटने के कारण पानी की विशाल मात्रा वह कर जब निचले इलाके में आती है तो बाढ़ मिट्टी का कटान और जमीन धंसने और पहाड़ दरकने की घटनाएं होती है |

वर्षा से पूर्व बादलों का रंग कैसा होता है

बादलों के रंग आकार प्रकार में पर्याप्त भिन्नता पाई जाती है | भारत जैसे मानसून वर्षा वाले देशों में प्राचीन काल से वर्षा का बड़ा महत्व रहा है, गर्मियों में झुलसा देने वाले मौसम के बाद जब बारिश आती है, तो चारों तरफ हरियाली और खुशहाली छा जाती है |
प्राचीन काल से ही बादलों के रंग को देखकर उनके बारे में पूर्वानुमान लगाने की एक पद्धति रही है, जैसा कि महाकवि घाघ ने कहा था |
करिया बादर जी डरवाये ।
भूरा बादर पानी लावे ।
अर्थात काले रंग के बादलों को देखकर डर लगता है जबकि भूरे रंग के बादल से बरसात अच्छी होती है |
हम सभी ने यह महसूस किया ही है कि, बरसात में जब गहरे काले बादल आते हैं तो, थोड़ी बारिश कम समय के लिए होती है, और जब बादलों का रंग भूरा होता है तो बारिश की मात्रा और समय दोनों ज्यादा होते हैं ,तो इस प्रकार वर्षा के पहले बादलों का रंग काला है या भूरा हो सकता है|

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बादल के पर्यायवाची शब्द

हिंदी भाषा में किसी संज्ञा के 1 से अधिक नामों को पर्यायवाची शब्द कहा जाता है |
बादल के लिए हिंदी में निम्न पर्यायवाची शब्द है |
जलचर, धाराधर, निर्धर, पयोद, जलधर, कादंबिनी, मेघावली, मेघमाला, घनमाला, वारी, धर, बलाहक, बदली, नीरद्, वारिद्, घन, घर, घट, अब्र, अंबूधर, जीमूत, पयोधर,अमेघ्, जलद, पर्जन्य ,जगजीवन, घटा आदि।

Badal

बादलों का वर्गीकरण

बादलों की भू सतह से ऊंचाई स्वरूप तथा आकार एवं आकाश ने उनके विस्तार के आधार पर काफी भिन्नता होती है, उचाई के आधार पर निम्न वर्गीकरण बादलों का किया जा सकता है |

ऊंचाई पर स्थित बादल
इन बादलों की ऊंचाई भू सतह से 6000 से 12000 मीटर तक की हो सकती है |

मध्यम ऊंचाई पर स्थित बादल
भू सतह से 2000 से 6000 मीटर के मध्य इन बादलों की ऊंचाई हो सकती है |

निम्न ऊंचाई पर स्थित बादल
भू सतह् से 2000 मीटर तक की ऊंचाई पर स्थित हो सकते हैं ।
अंतर्राष्ट्रीय रितु विज्ञान परिषद ने सन 1932 में बादलों का वर्गीकरण निम्न 10 आधारों पर किया था |

1)पक्षाभ् मेघ (Cirrus Clouds)
आसमान में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित यह बादल रुई के बड़े ढेर के रूप में दिखाई देते हैं ऊंचाई पर होने के कारण इनमें बर्फ के कण पाए जाते हैं, जिससे सूर्य और चंद्रमा से आने वाली किरणों का रिफ्लेक्शन होता है और यह आसमान में खूबसूरत दिखाई देते हैं परंतु अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण इनसे वर्षा नहीं होती है |

2)पक्षाभ् स्तरीय मेघ (Cirrus Stratus Cloud’s)
यह मेघ या बादल चादरों की तरह पूरे आसमान में फैले होते हैं, सामान्य ऊंचाई 7500 मीटर तक होती है, श्वेत दूधिया यह बादल, सूर्य और चंद्रमा से आने वाले प्रकाश को परावर्तित करके इनके चारों ओर प्रभामंडल (Halo) का निर्माण करते हैं |
इन बादलों के आने से चक्रवात आने की संभावना प्रबल होती है |

3)पक्षाभ् कपासी मेघ (Cirri Cumulus clouds)
छोटे-छोटे रूई के फाहे सी आकृति वाले यह बादल लहरदार पंक्तियों और समूहों में पाए जाते हैं इनकी ऊंचाई सामान्यतः 7500 मीटर तक हो सकती है |

4)उच्च स्तरीय मेघ् (Alto stratus clouds)

भू सतह से लगभग 5500 से 7500 मीटर की ऊंचाई पर यह बादल पाए जाते हैं, जो भूरे और गहरे रंग के होते हैं इस कारण सूर्य से आने वाला प्रकाश बाधित होता है, धुंधला और प्रकाश की मात्रा धरती पर कम पड़ती है यह बादल आसमान पर दूर-दूर तक फैले हुए होते हैं |

5) उच्च कपासी मेघ (Alto Cumulus clouds)

भू सतह से लगभग 3000 से 7000 मीटर की ऊंचाई तक स्थित यह बादल श्वेत और भूरे रंग के पतले गोलाकार बिंदु के आकार में दिखाई पड़ते हैं, पतली चादर की तरह यह सारे आसमान को ढक लेते हैं |

6) स्तरी कपासी मेघ (Strata Cumulus clouds)

सतह से इनकी ऊंचाई 2500 से 3000 मीटर तक हो सकती है भूरे रंग के वृत्ताकार धब्बों के रूप में इनका आकार होता है, इनका आकार एक समान परत की तरह होता है जो ठंडीयो के मौसम में सारे आकाश को ढक लेते हैं|

7) स्तरी बादल (Stratus clouds)

इनकी भी ऊंचाई सतह से 2500 से 3000 मीटर तक होती है, इनका निर्माण गर्म और ठंडी हवाओं के मिलने से होता है, ठंड के मौसम में शीतोष्ण कटिबंध क्षेत्रों में यह बादल पाए जाते हैं यह आकार में एक समान होते हैं | जो पूरे आकाश पर आच्छादित होते हैं |

8) वर्षा स्तरी बादल (Nimbo Stratus Clouds)

भू सतह से 1500 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाले यह बादल बरसात के मौसम में भूरे और काले रंग के होते हैं, इन बादलों में सघनता अधिक होती है जिससे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता है और अंधेरा छा जाता है इन बादलों से पर्याप्त वर्षा होती है |

9) कपासी मेघ् (Cumulus Clouds)
सामान्यतया इन बादलों की ऊंचाई 1000 से 3000 मीटर के मध्य हो सकती है इनका आकार गुंबद आकार होता है, और नीचे से सपाट होते हैं इनको साफ मौसम के दिनों में देखा जा सकता है जो आसमान में इधर-उधर बिखरे होते हैं |

10) कपासी वर्षा मेघ (Cumulus Nimbus Clouds)

इनकी ऊंचाई 6000 से 7000 मीटर तक हो सकती है आकार में ही विशाल स्तंभों की तरह दिखाई देते हैं, और लगभग सारे आसमान में दूर-दूर तक फैले होते हैं इन बादलों से भारी वर्षा ओलावृष्टि और झंझावात की संभावना होती है |

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