गोदावरी नदी ।उद्गम स्थल,अपवाह क्षेत्र, सहायक नदियां, प्राचीन नाम, धार्मिक महत्व

इस लेख में :-

गोदावरी नदी का उद्गम स्थल

गोदावरी किस प्रदेश की प्रमुख नदी है

गोदावरी नदी का अपवाह क्षेत्र

गोदावरी नदी की सहायक नदियां

गोदावरी नदी के किनारे बसे प्रमुख नगर

गोदावरी नदी का प्राचीन नाम

धार्मिक महत्व

गोदावरी नदी पर स्थित नदी घाटी परियोजनाएं

गोदावरी नदी डेल्टा

गोदावरी नदी भारतीय उपमहाद्वीप के प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी और प्रमुख नदी है, इसे दक्षिण गंगा के नाम से भी जाना जाता है ।
गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की उन गिनी चुनी नदियों में से एक है, जिसमें वर्ष भर जल रहता है । जैसे उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थल गंगा नदी के किनारे स्थित है उसी प्रकार दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख तीर्थ स्थल इस नदी के किनारे स्थित है ।
गोदावरी नदी का प्रवाह क्षेत्र अनोखा है, जहां इस नदी का उद्गम पश्चिम घाट में होता है और यह नदी दक्षिण पूर्व दिशा में प्रवाहित होते हुए पूर्वी घाट को पार करके बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

गोदावरी नदी का उद्गम स्थल :-

भारत के पश्चिम घाट में (त्रिंबकेश्वर) नासिक जिले से गोदावरी नदी का उद्गम होता है। यह स्थान त्रंबकेश्वर से 10 किलोमीटर की दूरी पर है, पहाड़ी के ऊपर के कुंड से इस नदी का उद्गम होता है |
यह कुंड समुद्र तल से 1000 मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर स्थित है | नदी 1456 किलोमीटर के प्रवाह के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को पार करते हुए बंगाल की खाड़ी में समा जाती है |

गोदावरी किस प्रदेश की प्रमुख नदी है :-

गोदावरी नदी का उद्गम महाराष्ट्र राज्य में होता है, और प्रवाह क्षेत्र भी महाराष्ट्र में ही अधिकतम है, परंतु यह नदी महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश के बड़े अपवाह तंत्र को नियंत्रित करती है ।
इस नदी के प्रवाह का सबसे ज्यादा लाभ महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश को प्राप्त होता है ।

गोदावरी नदी

गोदावरी नदी का अपवाह क्षेत्र :-

नासिक के त्रिंबकेश्वर के पास पहाड़ियों से उद्गम के पश्चात यह नदी दक्षिण पूर्व दिशा में प्रवाहित होती है ।
और अपनी कुल लंबाई का 57% भाग महाराष्ट्र में प्रवाहित होती है और तेलंगाना में 24% और 19% आंध्र प्रदेश में प्रवाहित होती है ।
अपवाह क्षेत्र में महाराष्ट्र तेलंगाना आंध्र प्रदेश मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ उड़ीसा के क्षेत्रों से जल प्राप्त करती है।

गोदावरी नदी की सहायक नदियां :-

गोदावरी नदी की विशालता में उसकी सहायक नदियों का योगदान महत्वपूर्ण है ।

सहायक नदियों को दो भागों में बांटते हैं दाएं तरफ से मिलने वाली और बाएं तरफ से मिलने वाली सहायक नदियां

दायीं ओर से मिलने वाली प्रवरा, मंजीरा,और मानेर

बायीं ओर से मिलने वाली इंद्रावती,पूर्णा,प्राणेता, और सबरी |

इन सभी मे प्राणेता सबसे बड़ी सहायक नदी है ।

गोदावरी नदी के किनारे बसे प्रमुख नगर :-

इस नदी के तट पर महाराष्ट्र तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ प्रमुख नगर स्थित हैं जो निम्न है |
नासिक, नांदेड,बसरा, भद्राचलम , राजमुंद्री, गंगाखेड निजामाबाद आदि ।

गोदावरी नदी का प्राचीन नाम :-

प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में गोदावरी नदी का वर्णन मिलता है इस नदी के कुछ प्राचीन नाम निम्न है |
दक्षिण गंगा, प्राचीन गंगा, गौतमी, सप्त गोदावरी, बूढ़ी गंगा ,आदि |

धार्मिक महत्व :-

दक्षिण भारत के लिए गोदावरी नदी का वही महत्व है जो उत्तर भारत के लिए गंगा नदी का है।

इस नदी के तट पर बसे नासिक शहर में विश्व प्रसिद्ध कुंभ मेले का आयोजन होता है, जैसे की मेले का आयोजन प्रयाग उत्तर प्रदेश में होता है।

इस नदी के तट पर बसे नांदेड़ में सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी की मृत्यु हुई थी, यहां तख्त श्री हुजूर साहिब स्थित है जो सिखों के लिए पूजनीय तीर्थ है।

गोदावरी नदी के तट पर स्थित भद्राचलम (आंध्रा प्रदेश ) मे भगवान श्री राम ने अपनी कुटिया बनायी थी | यहाँ माता सीता की रसोई का दर्शन आज भी  किया जा सकता है | स्थानीय लोगो के अनुसार यहीं पर रावण ने माता सीता का अपहरण किया था |

गोदावरी नदी पर स्थित नदी घाटी परियोजनाएं :-

भारत की दूसरी सबसे बड़ी और प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी के जल का उपयोग करने हेतु उतने बांध और परियोजनाओं का अभाव है, जितना इस नदी की क्षमता है । निर्मित प्रमुख बांध और परियोजनाएं निम्न है।

पोलावरम बांध परियोजना 

इस बांध परियोजना का निर्माण आंध्र प्रदेश के एलूर और ईस्ट गोदावरी जिले में किया जा रहा है ।

बांध की परिकल्पना और निर्माण में अंतर को इस बात से समझा जा सकता है कि बांध निर्माण के लिए प्रथम सर्वेक्षण 1947 में पूरा कर लिया गया था परंतु बांध का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है ।

यह परियोजना आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के मध्य विवाद का विषय बनी हुई है, और मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है ।

इस बांध का निर्माण पूरा होने के बाद आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 2.91 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जा सकेगी साथ ही 970 मेगावाट विद्युत का उत्पादन भी किया जा सकेगा।

श्री राम सागर परियोजना

गोदावरी नदी पर सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए यह परियोजना तेलंगाना राज्य के निजामाबाद जिले में स्थित है।

इनचंमपल्ली परियोजना

तेलंगाना में गोदावरी नदी और छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदी इंद्रावती के संगम स्थल से कुछ दूरी पर यह परियोजना निर्मित है। इससे तेलंगाना आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के दक्षिणी जिलों में सिंचाई की सुविधाओं में वृद्धि होगी।
इसके अतिरिक्त अन्य परियोजनाएं जो इस नदी पर स्थित है निम्न है सदरमठ एनीकट, घंटाघर बांध, जयकवाड़ी बाध गंगापुर बांध आदि ।

गोदावरी नदी डेल्टा :-

बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली सभी प्रमुख नदियां बड़े आकार के डेल्टा का निर्माण करती है ।
गोदावरी नदी भी बंगाल की खाड़ी में मिलने से पहले धावलेश्वरम में दो भागों में बट जाती है, गौतमी और वशिष्ठ नाम दो धाराएं बंगाल की खाड़ी में मिलती है और इन्हीं दो धाराओं के बीच गोदावरी नदी का विशालकाय डेल्टा स्थित है।

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