सांभर झील | ( Sambhar Lake ) क्यों खारा है

प्रकृति ने भारतीय उपमहाद्वीप को अनेकों नदियों और झीलों के उपहारों से नवाजा है जिन्होंने मानव जीवन को प्रभावित और लाभान्वित किया है |

                     उन्हीं में से एक भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में स्थित भारत की अंतर्देशीय खारे पानी की सबसे बड़ी झील सांभर ( Sambhar Lake)भी है |

सांभर झील की स्थिति 

 

              सांभर झील राजस्थान जयपुर जिले के फलोदी तहसील में स्थित है झील की लंबाई 32 किलोमीटर और चौड़ाई 3 से 12 किलोमीटर के मध्य है समुद्र तल से ऊंचाई 1200 फीट है और क्षेत्रफल 90 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है 

      भारत में स्थित खारे पानी की झीलों में इसका दूसरा स्थान है पहला स्थान उड़ीसा की चिल्का झील का  है किंतु यह सांभर झील, चिल्का झील से इस मामले में अलग है कि यह समुद्र से नहीं मिलती जबकि चिल्का झील का एक हिस्सा समुद्र से जुड़ा हुआ है, वही सांभर लेक पूर्णता भू आवेष्ठित  ( Land locked ) है |

सांभर झील के खारेपन का कारण 

                           राजस्थान के नागौर, जयपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर,जिलों में खारे पानी की झीले स्थित है, तो यह सवाल महत्वपूर्ण है कि जबकि यह जिले समुद्र से नहीं मिलती तो यह सारी झील खारी या नमकीन कैसे हैं, तो वैज्ञानिकों के अनुसार इन झिलों के खारा होने के पीछे मुख्यतः दो कारण है |

 1)   महाद्वीपीय विस्थापन या कॉन्टिनेंटल ड्रिफ्ट के कारण सागर का एक बड़ा भूभाग समुद्र के बाहर लाखों वर्ष पहले आ गया था, जो अब उत्तरी भारत के एक बड़े भूभाग का हिस्सा है, राजस्थान का यह भाग कभी टेथिस सागर के अंदर था महासागरीय विस्थापन के बाद समुद्र के अंदर से उठे इस भूभाग पर इन झिलों के रूप में  टेथिस सागर का अवशेष है, जो अभी भी मौजूद है |

2)  सांभर और कुछ प्रमुख झिलों में आने वाला पानी अरावली पर्वत की ओर से बहकर आई नदियों से आता है,अरावली पर्वत की शिष्ट और नाइस के गर्तों में नमकीन गाद  भरा हुआ है, यह नमकीन गाद नदियों के जल में  घुलकर इन झिलों  को और खारा बना रहा है |

              सांभर झील टेथिस सागर का अवशेष होने के कारण खारा है साथ हर आने वाली नदियों से मिलने वाले खारे पानी की कारण इस झील में नमक की मात्रा बढ़ जाती है साथ ही वर्ष के अधिकांश महीनों में सूरज की तेज चमक से वाष्पीकरण की क्रिया तेज हो जाती है और नमक का जमाव इस झील में बढ़ता ही जाता है |

सांभर झील में मिलने वाली नदियां 

         सभी बड़ी झील का स्रोत नदियां होती है सांभर झील भी इसका अपवाद नहीं है सांभर झील में पांच प्रमुख नदियों का जल आकर मिलता है जो निम्न है मंथा, रूपनगढ, खारी, खंडेला, तुरपमति यह नदियां अपने साथ नमक घोलकर इस झील में गिराती है जिससे झील का खारापन बढ़ता ही जाता है, बरसात के मौसम में जब इन नदियों में व्यापक मात्रा में वर्षा का जल आता है, तब झील का  खारापन कुछ कम हो जाता है |

सांभर झील में नमक का उत्पादन 

  

  भारत में नमक उत्पादन के मामले में गुजरात का कच्छ और सौराष्ट्र सबसे आगे है, परंतु सांभर जैसी झिलों से भी व्यापक मात्रा में नमक का उत्पादन होता है, सांभर झील से देश के कुल नमक उत्पादन का लगभग 8%  होता है, जो लगभग 20 लाख मैट्रिक टन प्रतिवर्ष है |

                   हिंदुस्तान  साल्ट लिमिटेड की सहायक कंपनी सांभर साल्ट लिमिटेड द्वारा यहां खाने योग्य नमक का उत्पादन किया जाता है | इस झील पर एक साल्ट म्यूजियम की भी स्थापना की गई है, जहां नमक के विभिन्न आकार की बनी हुई वस्तुएं रखी गई है | 

 

पर्यटन 

         सांभर  झील को निहारने हर वर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं, राजस्थान की राजधानी जयपुर से यह  मात्र 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |

                        झील पर घूमने और देखने का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च के मध्य है |  लेक पर कई प्रकार के जीव जंतु देखे जा सकते हैं, गुलाबी फ्लैमिंगो, सारस, पेलिकान, रेडशेकस, काली पंख वाली स्टील्स, और टिटिहरी प्रमुख है | नवंबर और दिसंबर माह में विदेशों से भी पक्षी यहां अपना डेरा बनाने के लिए आते हैं |

                    इस स्थल पर पहुंचने के लिए आवागमन के तीनों साधन (सड़क, रेल ,वायु )  उपलब्ध है सड़क माध्यम से जयपुर अजमेर आदि शहरों से बस या टैक्सी के माध्यम से यह पहुंचा जा सकता है |

                      रेल द्वारा भी यह स्थल देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है, सांभर झील के पास ही सांभर रेलवे स्टेशन मौजूद है |

 

                       वायु मार्ग से भी यह स्थान देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है, निकटतम हवाई अड्डा जयपुर का सांगानेर हवाई अड्डा है, वहां से बस और टैक्सी झील तक पहुंचने के लिए आसानी से उपलब्ध है |

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